कोरोना के संक्रमण से मुक्त होने के बाद क्या करें और क्या नहीं, स्वास्थ्य मंत्रालय की सलाह को जरूर मानें

 कोरोना के संक्रमण से मुक्त होने के बाद क्या करें और क्या नहीं, स्वास्थ्य मंत्रालय की सलाह को जरूर मानें

कोविड-19 के संक्रमण से मुक्त हो चुके लोगों के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने पोस्ट कोविड मैनेजमेंट प्रोटोकॉल जारी किए हैं.

नई दिल्ली: 

कोविड-19 के संक्रमण से मुक्त हो चुके लोगों के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने पोस्ट कोविड मैनेजमेंट प्रोटोकॉल जारी किए हैं. अभी तक स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया था कि कोरोना से बचने के लिए क्या करें या हो जाने पर क्या करें लेकिन अब पहली बार कोरोना से ठीक होने के बाद 'पोस्ट कोविड मैनेजमेंट प्रोटोकॉल' जारी किए गए हैं. जिसके अनुसार कोरोना से ठीक होने के बाद मरीज थकान, शरीर दर्द, खांसी, गले मे खराश, सांस लेने में दिक्कत की शिकायत कर सकते हैं. इस बात के अभी तक सीमित सुबूत हैं कि कोरोना का सिलसिला चलता रहता है लेकिन इस बारे में रिसर्च की जरूरत है और वो सक्रिय रुप से की जा रही है. पोस्ट कोविड मरीजों का ध्यान रखने और इलाज के लिए एक समग्र दृष्टिकोण की जरूरत है इसलिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना से ठीक हुए मरीजों का घर में ध्यान रखने प्रबंधन करने के लिए कदम बताए हैं. जिन मरीजों को पहले से ही कोई बीमारी रही होगी और जो कोरोना की ज़्यादा गंभीर फॉर्म से गुजरे होंगे उनमें ठीक होने का समय ज्यादा लगेगा. 

व्यक्तिगत स्तर पर ये करें

  • 1. मास्क पहने, साफ सफाई रखें और देह से दूरी बनाए रखें.
  • 2. अच्छी मात्रा में पानी पिए.
  • 3. आयुष मंत्रालय की इम्युनिटी बढ़ाने वाली दवाई लें.
  • 4. अगर स्वास्थ्य इजाजत देता है तो घर का नियमित काम करें, प्रोफेशनल काम धीरे-धीरे शुरू करें. 
  • 5. हल्की या मध्यम एक्सरसाइज करें. 
     - रोजाना योगासन, प्राणायाम और मेडिटेशन करें. 
      - इलाज करने वाले डॉक्टर ने सांस की एक्सरसाइज जैसे बताई हो वैसे करें
     - सुबह या शाम वॉक करें. 
  • 6. संतुलित आहार लें अच्छा रहेगा कि आप आसानी से पचने वाला नरम ताजा खाना खाएं.
  • 7. पर्याप्त नींद लें और आराम करें.
  • 8. धूम्रपान और शराब से परहेज करें.
  • 9. कोरोना और पुरानी बीमारी के लिए जो दवाई बताई गई हैं वह नियमित रूप से लें. डॉक्टर को आप सारी जानकारी दें कि आप एलोपैथिक या आयुष मंत्रालय की दवाई ले रहे हैं जिससे सब मिल ना जाये.
  • 10. घर पर सेल्फ हेल्थ मॉनिटरिंग करें जैसे कि तापमान, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, पल्स ऑक्सीमीटर आदि
  • 11. अगर सूखी खांसी या गले में खराश बनी हुई है तो गरारे करें और भाप लें/ इसमें औषधि या मसाले का इस्तेमाल किया जा सकता है. एलोपैथिक डॉक्टर या आयुष डॉक्टर की बताई दवाई खांसी के लिए इस्तेमाल करें.
  • 12. शुरुआती चेतावनी के लक्षणों पर ध्यान दें जैसे कि तेज़ बुखार, सांस लेने में दिक्कत और ऑक्सीजन का स्तर 95 फ़ीसदी से नीचे, बिना कारण सीने में दर्द, कमज़ोरी आदि. 
  • समाज के स्तर पर ये करें

1. कोरोना से ठीक हो चुके लोग अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ अपने सकारात्मक अनुभव साझा करें। आप सोशल मीडिया, समाज के नेता, ओपिनियन लीडर या धर्म गुरुओं के जरिए दी जागरूकता फैला सकते हैं और इस बारे में फैलने वाले भ्रम आदि को दूर कर सकते हैं

2. आप इनकी मदद ले सकते हैं- सेल्फ हेल्प ग्रुप, सिविल सोसाइटी ऑर्गेनाइजेशन और ऐसे पेशेवर लोग जो रिकवरी और रिहैबिलिटेशन प्रोसेस पर काम करते हैं( मेडिकल,सोशल,ऑक्यूपेशनल,लाइवलीहुड)

3. आप सहकर्मियों से, कम्युनिटी हेल्थ वर्कर से , काउंसलर से साइको-सोशल सपोर्ट ले सकते हैं। अगर जरूरत हो तो मेंटल हेल्थ सपोर्ट सर्विस लें

4. योगा और मैडिटेशन के ग्रुप सेशन में हिस्सा लें। लेकिन सभी तरह के एहतियात ले और देह से दूरी बनाए रखें

अस्पताल में ये करें

1. अस्पताल से डिस्चार्ज होने के 7 दिन के भीतर या तो शारीरिक रूप से या टेलीफोन के जरिए एक फॉलो-अप विज़िट करें। अच्छा होगा कि उसी अस्पताल में यह फॉलोअप विजिट हो जहां पर मरीज का ट्रीटमेंट हुआ

2. इसके बाद का ट्रीटमेंट और पोल ऑफ बजट पास के किसी अच्छे एलोपैथिक डॉक्टर या आयुष प्रैक्टिशनर या अन्य सिस्टम की मेडिकल फैसिलिटी में कर सकते हैं। पॉली थेरेपी से बचें क्योंकि अनजान दवाई आपस मे मिल सकती हैं और विपरीत परिणाम हो सकते हैं

3. ऐसे मरीज जो होम आइसोलेशन में रहे हैं, अगर उनको लगातार लक्षण बने हुए हैं तो वो पास के अस्पताल में जाएंगे

4. जो केस गंभीर हैं, क्रिटिकल केयर सपोर्ट की जरूरत है उनका सख्त फॉलो अप होना चाहिए

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